Sentencian a 90 años a secuestradores en Zinacantepec

Sentencian a 90 años a secuestradores en Zinacantepec
Estado de México
19-08-2026 17:20:00
Redacción Agencia NVM
  • Salvador y Martha interceptaron a la víctima en la vía pública para encerrarla en un falso centro de rehabilitación<!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!---->.

Toluca, Estado de México.- Un juez con sede en Almoloya de Juárez dictó una condena de 90 años de prisión para Salvador Huerta Castro y Martha Ramírez Sánchez<!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!---->. La Fiscalía General de Justicia del Estado de México (FGJEM) demostró la responsabilidad de ambas personas en el delito de secuestro<!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!---->. <!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!---->

Los hechos ocurrieron en junio de 2025 en el municipio de Zinacantepec<!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!---->. La víctima salió de su domicilio hacia la tienda cuando los agresores la interceptaron en la vía pública, sometiéndola y subiéndola por la fuerza a un vehículo<!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!---->. <!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!---->

Posteriormente, los sentenciados trasladaron a la persona a un inmueble habilitado como Centro de Rehabilitación<!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!---->. En ese sitio la mantuvieron privada de la libertad hasta que investigaciones de campo de la Fiscalía estatal permitieron su localización y rescate<!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!---->. <!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!---->

Tras obtener su libertad, la víctima denunció formalmente a sus captores, lo que permitió al Ministerio Público solicitar las órdenes de aprehension correspondientes<!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!---->. Agentes de la FGJEM capturaron a los implicados y los ingresaron al Penal de Almoloya<!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!---->. <!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!---->

Finalmente, las pruebas aportadas resultaron contundentes para que la autoridad judicial dictara la sentencia condenatoria de 90 años de cárcel para cada uno<!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!---->. Además del encierro, el juez ordenó la suspensión de sus derechos civiles y políticos<!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!---->.