- La Fiscalía General de Justicia del Estado de México obtuvo la condena tras acreditar la participación del implicado en los hechos ocurridos en 2024.
COACALCO, Estado de México. – Jesús Ramón González Aranda recibió una sentencia de 47 años y 6 meses de prisión tras demostrarse su responsabilidad en el delito de homicidio calificado<!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!---->. <!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!---->
El fallo judicial deriva de las indagatorias realizadas por la Fiscalía General de Justicia del Estado de México (FGJEM) sobre los hechos registrados el 24 de noviembre de 2024<!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!---->. En esa fecha, la víctima se encontraba en la vía pública de la colonia Ejidal, en el municipio de Coacalco<!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!---->. <!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!---->
De acuerdo con el expediente, el hoy sentenciado abordó al hombre y le disparó con un arma de fuego<!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!---->. La lesión provocada causó la muerte de la víctima, mientras el agresor escapó del lugar<!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!---->. <!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!---->
Tras la identificación del responsable, el Ministerio Público solicitó y obtuvo una orden de aprehensión<!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!---->. El sujeto fue capturado y trasladado a un Centro Penitenciario y de Reinserción Social, donde permaneció a disposición de la autoridad judicial<!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!---->. <!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!---->
Además de la pena privativa de la libertad, el Órgano Jurisdiccional impuso una multa de 92 mil 284 pesos y ordenó el pago de 237 mil 768 pesos por concepto de reparación del daño moral<!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!---->. Asimismo, se dictó la suspensión de sus derechos civiles y políticos<!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!----><!---->.